मच्छर भगाने वाली ‘कंफर्ट’ अगरबत्ती पर प्रतिबंध लगा, नागरिकों के लिए चेतावनी जारी
लखनऊ
भारत में घरेलू कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली गैर-लाभकारी संस्था, होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (HICA) ने मच्छर भगाने वाली अवैध अगरबत्ती ‘कंफर्ट’ पर सरकारी अधिकारियों की कार्रवाई का स्वागत किया है। ‘कंफर्ट’ मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती की बिक्री पूरे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, और दिल्ली में की जाती है, जिसका विनिर्माण मेसर्स ‘धूप छांव कंपनी’ करती है। खुले बाज़ार से इकट्ठा किए गए नमूनों से पुष्टि हुई है कि यह उत्पाद खुले-आम ग्राहकों को बेचा जा रहा था जबकि महाराष्ट्र कृषि विभाग की ओर से प्रयोगशाला में की गई जांच के दौरान कंफर्ट में डाइमेफ्लुथ्रिन, एक अवैध रसायन पाया गया जिसके उपयोग की मंज़ूरी कंपनी ने पास नहीं थी। बताया जाता है कि ‘कंफर्ट’ अगरबत्ती की बिक्री उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, वाराणसी, कानपुर से अन्य इलाकों में की जाती है।
अधिकारियों को मुंबई में डाले गए छापे के दौरान, ‘कंफर्ट’ अगरबत्ती के कई डब्बे मिले जिनमें डाइमेफ्लुथ्रिन था। धूप छांव कंपनी के पास लाइसेंस नहीं था और न ही उसे CIBRC से मंज़ूरी मिली थी। इस तरह कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के तहत ‘कंफर्ट’ अगरबत्ती का उत्पादन और बिक्री दोनों अवैध है।
कई अवैध अगरबत्तियां हर्बल होने के झूठे दावे के साथ बेची जा रही हैं, जबकि उनमें अवैध और सरकार द्वारा अमान्य रसायन होते हैं, जिनमें कंफर्ट, स्लीपवेल और रिलैक्स जैसे नामों से बेचे जाने वाले उत्पाद शामिल हैं। इससे पूरे भारत में अवैध मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों के खिलाफ कार्रवाई में बढ़ोतरी हुई है, जिनमें अवैध कीटनाशक होते हैं। ऐसी पहलों से नियामकीय निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता ज़ाहिर होती है।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाली सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी (CIBRC) एक वैधानिक संस्था है जो भारत में मच्छर भगाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को बनाने, आयात करने या बिक्री से पहले मंज़ूरी देने और पंजीकरण करने का उत्तरदायित्व निभाती है। सरकार द्वारा CIBRC से मान्यता प्राप्त मच्छर भगाने वाले उत्पादों पर एक पंजीकरण नंबर (CIR – सेंट्रल इंसेक्टिसाइड रजिस्ट्रेशन नंबर से शुरू) होता है जो उत्पाद के पैकेट पर साफ तौर पर लिखा होता है, जिससे ग्राहक प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं और सुरक्षित उत्पाद चुन सकते हैं।
डाइमेफ्लुथ्रिन और मेपरफ्लुथ्रिन जैसे रसायन को CIBRC से मंज़ूरी नहीं मिली है, इसलिए मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों में इनका इस्तेमाल अवैध है। इसके अलावा, सरकार की ओर से मंज़ूर मच्छर भगाने वाले उत्पाद को CIBRC से अनुमति हासिल करने पहले कठोर परीक्षण से गुज़रना पड़ता है।
होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (CIBRC) के मानद सचिव, जयंत देशपांडे ने इस घटनाक्रम पर अपनी टिप्पणी में कहा, “हम कंफर्ट जैसी अवैध मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों के खिलाफ निर्णायक और समय पर कार्रवाई करने के लिए सरकार की सराहना करते हैं। अगरबत्ती रिपेलेंट फॉर्मेट में डाइमेफ्लुथ्रिन जैसे अवैध और अमान्य रसायनों का गलत इस्तेमाल बहुत चिंताजनक है, जिससे उत्तर प्रदेश में लोगों को खतरा होता है। ऐसे उत्पाद जानबूझकर बिना नियामकीय मंज़ूरी के बेचे जाते हैं और उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाकर गुमराह किया जाता है कि वे सुरक्षित हैं। यह कार्रवाई उन लोगों
के हित में है जो अनजाने में मच्छर भगाने वाली नकली अगरबत्ती खरीदते हैं। सरकार की इस कार्रवाई से यह साफ संदेश जाता है कि अवैध विनिर्माताओं और वितरकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम सभी राज्यों में लगातार ऐसी कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं और उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे मच्छर भगाने वाले केवल वही उत्पाद खरीदें जिन पर वैध CIBRC पंजीकरण नंबर हो।”
गौरतलब है कि प्रवर्तन अधिकारियों ने पिछले साल नवंबर में, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में ‘स्लीपवेल’ ब्रांड नाम से बेची जा रही ₹69 लाख की अवैध मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती ज़ब्त की थी, जिनमें मेपरफ्लुथ्रिन पाया गया था। यह एक ऐसा कीटनाशक है जिसे सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी (CIBRC) ने मंज़ूरी नहीं मिली है।
होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (HICA) अवैध उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित तथा नियमों का पालन करने वाले घरेलू कीड़े-मकोड़े के नियंत्रण से जुड़े समाधान की पहचान करने के बारे में शिक्षित करने के लिए नियामक और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।









