कौमी एकता के प्रतीक मौलाना सिराज अहमद कमर की याद मे मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन।

ब्यूरो चीफ फहीम सिद्दीकी

फतेहपुर बाराबंकी। कल रात कस्बा फतेहपुर के मंगल बाजार मैदान मे हिंदू मुस्लिम एकता के सूत्रधार रहे स्व मौलाना सिराज अहमद कमर की याद में एक मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन नगर पंचायत फतेहपुर के चेयरमैन इरशाद अहमद कमर द्वारा किया गया।


मुशायरा की सरपरस्ती मौलाना मेराज अहमद क़मर एवं सभासद संतोष मिश्रा ने संयुक्त रूप से की जबकि निजामत मशहूर नाजिमे मुशायरा नदीम फर्रुख ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यातिथि न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार,अपर न्यायधीश नसीर अहमद,पूर्व बार महासचिव हाईकोर्ट बल्केश्वर श्रीवास्तव,मेजर दानिश इदरीसी,बंकी चेयरमैन प्रति इमरान खान,दरियाबाद चेयरमैन, जैदपुर चेयरमैन दाउद अलीम,देवा चेयरमैन हारून वारसी के साथ पत्रकार एवं कस्बा फतेहपुर की हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक रहे विभिन्न सामाजिक हस्तियों स्व गुरु नारायण निगम,पूर्व चेयरमैन गनी हैदर,डा तौसीफ सिद्दीकी,नसीर फतेहपुरी, स्व रजी हसन उर्फ हसन मियां,शायर नसीम फतेहपुरी को सम्मानित किया गया,मोमेंटो उनके परिजनों ने ग्रहण किया।

इस अवसर पर आयोजक चेयरमैन इरशाद अहमद क़मर ने कहा कस्बा फतेहपुर का सामाजिक सौहार्द बेमिसाल है और इस सौहार्द को मजबूत करने का हमारा प्रयास रहेगा। कस्बा के लोगों ने जिस उम्मीद से हमे चेयरमैन बनाया है उनकी उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास रहेगा। समस्त कस्बा का विकास हमारी प्राथमिकता है।इसके साथ उन्होंने कहा की चुनाव के समय जनता से हमने बारात घर और खेल मैदान देने का जो वादा किया था बहुत जल्द उसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।आगे उन्होंने नगर पंचायत के प्रत्येक वार्ड से एक गरीब बच्चे की शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा की। इस मौके पर जिन शेरो को पसंद किया गया वह –
फुर्सत हो सितारों की बारात में आ जाओ,
तुम्हे चांद देखना है तो रात में आ जाओ।
मोनिका देहलवी

हमे तो खुद से भी मिलना मुहाल होता है,
तुम्हे तो हम बड़ी असानियों से मिल गए।
हाशिम फिरोजाबादी

अभी उड़ते नही है फाख्ता के साथ है बच्चे,
अकेले छोड़ देंगे मां को जिस दिन पर निकल आएंगे।
महशर अफरीदी

रात भर दर्द की शाख पर इक दिया झिलमिलाता है,
आंख मंजर बनाती रही और दिल मुस्कुराता रहा।
अज्म शाकिरी

ऐसी फजा बनाओ मेरे देश वासियों,
हिंदू का घर जले तो मुसलमान रो पड़े।
निकहत अमरोही

तेरे चेहरे से हटती नही है नजर,
तेरी तस्वीर ने कर दिया वह असर।
सबा बलरामपुरी

एक छोटी बात पर वह रूठ क्या गए,
फिर उनको मनाने मे पूरी रात कट गई।
गुले सबा फतेहपुरी

रेजा रेजा बिखर गए होते,
तुम ना होते तो मर गए होते।
वसीम रामपुरी

इसे तहजीब सिखाओ वगरना,
यह बच्चा हाथ तुम पर छोड़ देगा।
अफजाल दानिश।

इसके अलावा कमल हाथवी,सज्जात झंझट,अकमल बलरामपुरी ने भी अपने रचनाएं प्रस्तुत की।
इस मौके पर सय्यद जफरूल इस्लाम पप्पू,मंसूर खां,अलीम शेख,खलीक अहमद पप्पू,बिशन सिंह,मो वहीद,इम्तियाज मलिक,आरिफ खान,मुकीत उर्रहमा आदि उपस्थित रहे। अंत मे कन्वीनर मुशायरा डा फहीम अंसारी ने आए हुए मेहमानों,शायरों एवं कवियों को आभार प्रकट किया।