दिल्ली:
टेलीग्राम मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर देश के नागरिकों की निजी जानकारियां लीक हो गई हैं। यह जानकारी नागरिकों ने कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन की खुराक लेने के लिए सरकार के कोविन पोर्टल पर डाली थी. इनमें लोगों के पास नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि जानकारियां होती हैं। हालांकि दो साल पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ आरएस शर्मा ने कोविन वेबसाइट से सूचनाएं लीक होने की खबरों को खारिज कर दिया था।

कोविन पोर्टल से जो जानकारी लीक हुई है, उसमें नागरिकों के आधार नंबर, पैन नंबर, पासपोर्ट नंबर, जन्मतिथि और वैक्सीन की खुराक लेने के स्थान आदि की जानकारी सार्वजनिक हुई है. यह जानकारी कोविन पोर्टल पर मोबाइल नंबर डालकर पता की जा सकती है। मोबाइल नंबर के बजाय आधार नंबर दर्ज करके भी इन विवरणों तक पहुंचा जा सकता है। इतना ही नहीं कोविन पोर्टल पर अगर एक ही फोन नंबर से कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था तो इस नंबर को डालते ही इन सभी लोगों की जानकारी सामने आ सकती है.

जिनका ब्योरा लीक हुआ उनमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और पी चिदंबरम और तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन शामिल हैं। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण का नंबर डालने पर उनके आधार नंबर के अंतिम चार अंक, जन्म तिथि और उनकी पत्नी व उत्तराखंड के कोटद्वार से भाजपा विधायक रितु खंडूरी का सारा विवरण सामने आ गया. इनके अलावा राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त जैसे पत्रकारों की भी जानकारियां लीक हुई हैं।

2021 में जब ऐसी खबरें आईं कि कोविन पोर्टल से नागरिकों की जानकारी लीक हो रही है तो केंद्र सरकार ने इसे खारिज कर दिया और इस बात से इनकार किया कि कोविन पोर्टल हैक नहीं हुआ है. दरअसल, डेटा लीक मार्केट नाम की एक वेबसाइट ने दावा किया था कि वह भारत में कोविड-19 वैक्सीनेशन करवाने वाले लोगों का डेटा बेच रही है। उसने कहा था कि वह डेटा लीक नहीं कर रही है बल्कि इस डेटा को बेच रही है।

इसके बाद नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ आरएस शर्मा ने बयान दिया कि डार्क वेब पर हैकर्स का दावा बकवास है और कोविन पोर्टल का डेटा लीक निराधार है. आरएस शर्मा न केवल कोविन पोर्टल के प्रमुख हैं, बल्कि वैक्सीन प्रशासन पर एम्पोर्ड ग्रुप के अध्यक्ष भी हैं। लेकिन उनके दावे के विपरीत टेलीग्राम पर उनका निजी डाटा लीक हो गया।