मुसलमानों में बढ़ी है शैक्षिक जागरूकताः मौलाना इस्लाही

मुसलमानों में बढ़ी है शैक्षिक जागरूकताः मौलाना इस्लाही

विभिन्न शैक्षिक बोर्डों के होनहार छात्र हुए सम्मानित

लखनऊः जब हम शिक्षा और कला से जुड़े थे तो हमने दुनिया का नेतृत्व किया। जब हम शिक्षा से दूर हो गए तो हमसे नेतृत्व छिन गया और विकास की दौड़ में हम पीछे रह गए। उक्त विचार व्यक्त ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन दिल्ली और हीरा एजुकेशन ट्रस्ट लखनऊ के सहयोग से गन्ना संस्थान में आयोजित विभिन्न शैक्षिक बोर्डों के होनहार छात्रों के  पुरस्कार वितरण कार्यक्रम से जमाते इस्लामी के अध्यक्ष मौलाना इनामउल्लाह इस्लाही ने व्यक्त किये। 

उन्होंने  कहा कि आज अतीत के मुकाबले मुसलमानों में शैक्षिक जागरूकता आई है। छात्रों छात्राओं ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम मुसलमान हैं हमारी पहचान मुसलमान की हैसियत से है।हमने पूरी दुनिया का नेतृत्व शिक्षा की वजह से किया था लेकिन हम इससे दूर हुए तो बदले में हम शिक्षाए विकास और आर्थिक दौड़ में पिछड़ गये। छात्रों को आगे बढ़कर उस स्थान को प्राप्त करना है।

तारिक सिद्दीकी ने कहा कि छात्रों के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी है। देश को संवारने कीए मिल्लत को विकास के रास्ते पर ले जाने की। उन्होंने कहा कि आज देश की 56 प्रतिशत आबादी युवाओं की है जो दुनिया के किसी देश में नहीं है। युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में बढ़कर नेतृत्व करना है। यदि हमने शिक्षाए सलीका, हुनर मंदी सीख ली तो दुनिया का नेतृत्व हमारे हाथों में होगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम एक जीवन  दर्शन है। इस्लाम के विरोधी गंदी जहनियत की साजिश के तहत नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे है उसे समाप्त करने की जिम्मेदारी आपकी है। उन्होंने कहा कि इस्लाम को मानने वाला आतंकवादी नहीं हो सकता। दाढ़ी रखने से कोई मुसलमान नहीं होता जो ऐसी हरकतें करते हैं वे इस्लाम विरोधियों के एजेंट हैं। उनसे डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कुरान को विज्ञान की जरूरत नहीं  बल्कि विज्ञान कुरान की जरूरत है। उन्होंने अपज्ञान विशेषज्ञों के इस सिद्धांत का वर्णन करते हुए कहा कि जब किसी की गति सूरत की रौशनी से तेज हो जाती है तो समय ठहर जाता है। इस वैज्ञानिक  सिद्धांत से यह साबित होता है कि मेराज की घटना में बिस्तर भी गर्म रहा और कुंडी भी हिलती रहीए इस सच्चाई को साबित करता है। 

ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के महासचिव टी आरिफ अली ने कहा कि मुसलमानों की भाषा उर्दू है भाषा जीवित रखने के लिए इसकेभर जयपुर उपयोग की आवश्यकता है। उन्होंने उर्दू भाषा से कम जाानकारी होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि केरल का रहने वाला हूँ हमारी मातृ भाषा उर्दू नहीं है। आप नहीं पढ़ते हैं इसलिए हमने पढ़ना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश को खतरा आबादी से नहीं बल्कि रिसोर्सेज से है। उन्होंने बदलाव लाने के लिए बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय देने की जरूरत पर बल दिया। हमें बच्चों को समय की आवश्यकताओं से अवगत कराते हुए उन्हें आगे बढ़ने में  प्रोत्साहित करना होगा। उन्हें उच्च शिक्षाए विज्ञान तकनालोजी के क्षेत्र में जोड़ना होगा ।

सूचना अधिकारी हैदर अब्बास रिजवी ने कहा कि बच्चो! यह पुरस्कार तुम्हें बहुत दूर ले जाने में मदद करेगा। उन्होंने छात्रों से बेहतर किताब चुनने पर जोर दिया। अश्लील किताब से दूर रहने की नसीहत। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करना माता पिता के लिए जरूरी है। उन्होंने एक घटना सुना सबको भावुक कर दिया।

जमाते इस्लामी यूपी के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद नईम ने फाउंडेशन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। वसीम हैदरए अरशद आजमीए जुबैर मुल्क, बेगम शहनाज सिदरत आदि ने छात्रों को सम्मानित किया।

इस मौके पर यूपी बोर्डए सीबीएसईए आई सी एस ई और मदरसा बोर्ड के सैकड़ों होनहार छात्रों को पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सलीम ख़ान ने किया

Lucknow, Uttar Pradesh, India