दिल्ली मेट्रो का सफलताओं से विफलताओं तक का एक सुहाना सा सफर

दिल्ली मेट्रो का सफलताओं से विफलताओं तक का एक सुहाना सा सफर

तरुणा नेगी

जब किसी सफर की शुरूआत होती है फिर उसमें दो पड़ाव यानी की बुरा समय और अच्छा समय का पल रहना स्वाभाविक ही रहता है. जिसे एक तरह से किसी की सफलता व विफलता के साथ देखा जा सकता है. ऐसा ही एक आरामदायक सफर का मजा दिल्ली वासियों ने वर्ष 2002 से लेना आरंभ किया. जिसे दिल्ली मेट्रो, मेरी मेट्रो के नाम से पहचान मिली.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली में शाहदरा से तीस हजारी तक के रूट को हरी झंडी दिखाई. इसके बाद दिल्ली में मेट्रो ने दूसरा फेज किया फिर तीसरा, चौथा आदि, और इन फेज को येलो लाइन, ब्लयू लाइन, वॉलेट लाइन से सतरंगी रंगों से जोड़ दिया. इन रंगों से मेट्रो कामयाबी के सफर में तेजी के साथ दौड़ लगाने लगी और दिल्ली वासियों की आधी से ज्यादा परेशानी यानी सुबह टाइम पर ऑफिस पहुंचना, स्वेच्छा से ड्रेस और सफर में चैन के साथ अपने लिए टाइम मिलना यह सभी कुछ मेट्रो ने दिल्ली वासियों को दिया.

दिल्ली के लिए मेट्रो अब महत्व रखने लगी और दिल्ली की पहचान का हिस्सा भी बन गई. लेकिन यह सफर का एक ही फेज था अभी दूसरा फेज मसलन विफलता का रहता है, सफर जो ठहरा. दिल्ली की रफ्तार अपने लक्ष्य को पूरा करने में लगी थी पर मेट्रो की रफ्तार में अब जंक लगाना साफ दिखाई दिया. दिल्ली वासियों को मेट्रो में खराबी जैसे बीच में रुकना, मेट्रो का लेट होना टोकन की लंबी कतारें से दिक्कत शुरू हुई. जिसने बाद में मेट्रो की पहचान को धूमिल करना शुरू कर दिया.

मेट्रो की सफलताओं व विफलताओं से अलग मेट्रो ने सामाजिक संदर्भ व सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने में भी भूमिका निभाई है. मेट्रो द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए रात 11 बजे तक मेट्रो चलाने का फैसला लेना, मेट्रो में लापता लोगों के लिए उद्घोषणाएं करना, उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन में कला व  संस्कृति और राजीव गांधी मेट्रो स्टेशन पर नोबेल सम्मान से संबंधित संग्रहालय का उद्घाटन करना मेट्रो का समाज व संस्कृति के प्रति अथक प्रयास को दर्शाता है. 

इसके साथ-ही-साथ मेट्रो ने कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाएं, जैसे की मेट्रो स्टेशन के बाहर मेट्रो फीडर सेवा का उलपब्ध होना ,फूड कॉर्नर स्टॉल और मेट्रो पार्किंग की सुविधा. देखा जाए तो मेट्रो दूसरों के लिए भी उपयोगी साबित हुई है.

यह दिल्ली मेट्रो की उलब्धियों का ही नतीजा है दिल्ली से शुरू हुई मेट्रो महाराष्ट्र, जयपुर और चेन्नई में आरंभ हो गई है.

इन सब के बावजूद मेट्रो दिल्लीवासियों की पहले जैसी मेट्रो न रही हो लेकिन मेट्रो, की सेवा लोगों को अभी तक आरामदायक सफर का मजा दे जरूर रही है.