सीबीआई अधिकारी ने माना, निर्दोष थे आरुषि के माता-पिता

सीबीआई अधिकारी ने माना, निर्दोष थे आरुषि के माता-पिता

नई दिल्ली: हाल में रिलीज हुई फिल्म 'तलवार' ने एक बार फिर 2008 में आरुषि तलवार हत्याकांड के मसले को सुर्खियों में ला खड़ा किया है। सभी की जुबान पर फिर वही सवाल है कि आखिर किसने की हत्याएं... पिछले सात साल से सीबीआई के उस अधिकारी जिसने इस मामले की सबसे पहले जांच की, ने चुप्पी तोड़ी है। अधिकारी ने एक बयान में कहा है कि उसका मानना है कि आरुषि के माता-पिता यानि राजेश तलवार और नुपूर तलवार निर्दोष हैं।

सीबीआई में तब सहायक निदेशक के पद पर तैनात अरुण कुमार (जिसकी भूमिका फिल्म में इरफान खान ने निभाई है) ने कहा कि जांच में राजेश तलवार और नुपूर तलवार को दोषी साबित करने के लिए कोई भी सबूत नहीं मिला। फिलहाल राजेश और नुपूर दिल्ली के निकट डासना जेल में बंद हैं।

कुमार, जो अब सीआरपीएफ में तैनात है, का कहना है कि उनका ऐसा मानने के पीछे कई कारण हैं। पहला और सबसे अहम तो यह कि हत्यारे यह पहले से ही नहीं मान सकते थे कि हेमराज का शव पुलिस को घटना के पहले दिन नहीं, अगले दिन मिलेगा।

बता दें कि हेमराज का शव उसी घर की छत पर मिला था और वह भी नोएडा पुलिस ने बरामद किया था। यह घटना के दूसरे दिन पुलिस को मिला था। कुमार का कहना है कि मौके से फॉरेंसिक सैंपल कभी लिए ही नहीं गए, अगर लिए गए होते तो यह केस काफी पहले सुलझा लिया जाता।

सीबीआई की जांच में भी दो टीम बनाई गई थी और यह तथ्य कभी सामने नहीं आया कि जांच में दोनों ने ही एक-दूसरे के विपरीत निष्कर्ष निकाले थे। पहला निष्कर्ष यह निकाला गया था कि तलवार के नौकरों ने ही आरुषि की हत्या की, लेकिन दूसरी टीम का निष्कर्ष था कि माता-पिता ने ही हत्या की जब उन्होंने आरुषि को नौकर हेमराज के साथ पाया।

कुमार की थ्योरी के मुताबिक तलवार के नौकर कृष्णा ने आरुषि और हेमराज की हत्या की क्योंकि हेमराज ने कृष्णा और राजकुमार को आरुषि से यौन हमला करने से रोका था। इस विचार को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जब नए सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार ने पदभार संभाला।

जब कुमार से यह पूछा गया कि दो निदेशकों के बीच-मनमुटाव की वजह से जांच में इतनी दिक्कत आई, जो कि फिल्म में भी दिखाया गया है, तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। कुमार का यह भी कहना है कि जब दूसरी टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी तब एक बैठक में उनसे भी सलाह ली गई थी। मैंने साफ कहा था कि एक भी साक्ष्य ऐसा नहीं है जिससे की हत्याकांड में राजेश तलवार या फिर नुपूर तलवार के संबंध को जोड़ा जा सके। इस बैठक के बाद जांच में क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।

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