यातायात व्यवस्था में गोमती नदी का इस्तेमाल

यातायात व्यवस्था में गोमती नदी का इस्तेमाल

एमिटी विश्वविद्यालय के छात्रों ने मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया नया प्लान 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित सभी शहरों की यातायात व्यवस्था को ठीक करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना सड़क पर चलने में काफी मुश्किल होती है और अक्सर ट्रैफिक जाम इत्यादि के कारण गम्भीर परिस्थितियां बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ जैसे अधिकतर प्रमुख शहरों में यातायात की दिक्कत है, इसलिए अब हमें इन शहरों पर ध्यान देना होगा, ताकि ट्रैफिक की मुश्किलों से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे राज्य में यातायात व्यवस्था को ठीक करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह विचार आज यहां अपने सरकारी आवास पर एमिटी विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा लखनऊ शहर के लिए गोमती नदी का इस्तेमाल करते हुए एक नई यातायात व्यवस्था की प्लानिंग पर दिए गए प्रस्तुतिकरण के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ का फैलाव बड़ी तेजी से हो रहा है। शहर की अवस्थापना सुविधाओं पर बढ़ते हुए दबाव को देखते हुए राज्य सरकार यहां की सड़कों सहित अन्य अवस्थापना सुविधाओं का तेजी से विकास कर रही है। शहर में नए पुलों, आर0ओ0बी0 इत्यादि का निर्माण तो करवाया ही जा रहा है, साथ ही सड़कों को चैड़ा भी किया जा रहा है, ताकि यातायात सुगम बना रहे। आवागमन के नए विकल्पों पर भी गम्भीरता से कार्य किया जा रहा है, जिसका परिणाम है कि लखनऊ में मेट्रो रेल जैसी सुविधा अगले वर्ष अक्टूबर माह तक शुरू हो जाएगी।

एमिटी के छात्रों ने अपने प्रस्तुतिकरण में बताया कि लखनऊ शहर में लगभग 300 बसें, 17 हजार आॅटोरिक्शा और 12 लाख प्राइवेट वाहन हैं। छात्रों ने अपने प्रस्तुतिकरण में कहा कि लखनऊ शहर गोमती नदी के तट पर बसा है। यह नदी शहर के दोनों सिरों को जोड़ती भी है। अगर गोमती नदी का इस्तेमाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए किया जाए, तो इससे न केवल समय और पैसों की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह बहुत लाभकारी होगा। 

प्रस्तुतिकरण के अनुसार इस प्रोजेक्ट में लगभग 60 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिससे शहर के आठों पुलों के पास डाॅकयार्ड और नावों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए विशेष प्रकार की कैटामारन फैरीज (नाव) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो महज दो फिट पानी में भी चल सकती हैं। इससे गोमती नगर से चैक पहुंचने का समय न केवल घटकर आधा हो जाएगा, बल्कि इसका किराया भी सामान्य किराए से कई गुना कम हो जाएगा। इसके संचालन से पर्यावरण प्रदूषण और सड़क जाम पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तुतिकरण को बहुत ही बारीकी के साथ देखा और कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि लखनऊ में लगभग तीस वर्ष पहले तक गोमती नदी में चलने वाली नावें शहरी यातायात का प्रमुख साधन हुआ करती थीं। छात्रों को उनके प्रयास के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि जल्द ही वह इस सम्बन्ध में एक बैठक करेंगे और इसकी सम्भावनाओं को तलाशेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां कही भी नदियां बहती हैं, वहां इस तरह की यातायात व्यवस्था अपनाई जा सकती है। 

प्रस्तुतिकरण के दौरान एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के प्रति कुलपति, सेवानिवृत्त मेजर जनरल के0के0 ओहरी, निदेशक एमिटी बिजिनेस स्कूल प्रो0 वी0पी0 साही, उप निदेशक जनसम्पर्क एवं संचार एमिटी विश्वविद्यालय श्री आशुतोष चैबे तथा एमिटी स्कूल आॅफ आर्किटेक्चर एण्ड प्लानिंग की कोआर्डिनेटर सुश्री दीप्ती पांडे राना भी मौजूद थे।

Lucknow, Uttar Pradesh, India