शिक्षक को इंजन बनकर विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाना होता है: कुलाधिपति

शिक्षक को इंजन बनकर विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाना होता है: कुलाधिपति

मथुरा। छात्र-छात्राओ के सामने शिक्षक एक रोल माडल की तरह होता है। इसलिए शिक्षक का दायित्व और भी बढ़ जाता है। आपके ऊपर अनेक अन्य घरेलू जिम्मेदारियां होती हैं, जिसका तनाव और बोझ भी रहता है लेकिन जब आप कक्षा में हों तो उस सबको भूलकर अपने विद्यार्थियों को अपना शत प्रतिशत दें। अपने बोझ और तनाव को अपनी इस बड़ी जिम्मेदारी पर हावी न होने दें।

यह बात संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने विश्विद्यालय में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में डीन और फैकल्टी को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आपको इंजन बनकर विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाना है। मैंने सीखा है कि यदि आप कुछ ठान लेते हैं तो बीच में आने वाली कोई रुकावट आपको लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं सकती। विद्यार्थियों की क्षमता से परिचित हों और उन्हें परिष्कृत करें, सभी शिक्षकगण एक माला के मोती बनकर एक साथ अपना और विश्विविद्याल का नाम ऊंचा करें। इसी के साथ उन्होंने सभी शिक्षकों शिक्षक दिवस की बधाई दी।

समारोह में विश्वविद्यालय की विशेष कार्याधिकारी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपके अंदर बच्चों को सही मार्गदर्शन की क्षमता है, इस क्षमता को पूरी जिम्मेदारी से निभाएं। उनके भविष्य के निर्माण में सहयोग करें। कुलपति डा. राना सिंह ने कहा कि अच्छा शिक्षक ही महान शिक्षक बनता है। शिक्षक को चाहिए कि वह विद्यार्थियों से सामंजस्य स्थापित करे उनकी प्रोफेशन स्किल को बाहर लाए और उसे एक योग्य प्रोफेशन बनने में मदद करे। इस मौके पर विश्वविद्याल के सभी विभागों के डीन और फैकल्टी ने कविताओं और अपने विचारों से समारोह में चार चांद लगा दिए।

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