इंग्लैंड पहुंची या पहुंचाई गयी?

इंग्लैंड पहुंची या पहुंचाई गयी?

तौक़ीर सिद्दीक़ी : क्रिकेट की दुनिया में आज एक बात गश्त कर रही है कि इंग्लैंड की टीम सेमी-फाइनल में पहुंची नहीं पहुंचाई गयी है| हालाँकि इस बात को कोई सबूत के साथ साबित तो नहीं कर सकता लेकिन विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट को इस खेल के प्रशंसक बहुत बारीकी से देखते हैं और जब कुछ अचानक से अलग होने लगता है तो सवाल भी उठने लगते हैं वैसे यह टीवी का ज़माना है और तस्वीरें सारी कहानियां बयान कर देती हैं|

मैं जानता हूँ कि मेरे विचारों से ज़्यादातर लोग सहमत नहीं होंगे लेकिन ऐसे लोगों से मैं सिर्फ एक बात कहूंगा कि इंडिया-अफ़ग़ानिस्तान, इंडिया-इंग्लैंड और इंडिया-बांग्लादेश के मैचों की रिकॉर्डिंग दोबारा देखें उन्हें साफ़ पता चल जाएगा कि इंडिया-अफ़ग़ानिस्तान, इंडिया-बांग्लादेश के मैचों में खिलाडियों की मनोदशा, हावभाव, सोच, अप्रोच जैसी थी वह इंडिया-इंग्लैंड के मैच में बिलकुल नज़र नहीं आयी| इंडिया 338 का टारगेट चेज़ कर रही थी और खिलाडियों के चेहरों पर कोई चिंता नहीं झलक रही थी, यहाँ तक कि कप्तान विराट बड़े इत्मीनान से बर्गर खा रहे थे| यह वही विराट हैं जिन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में मोहम्मद शामी को फील्डिंग में थोड़ी सी सुस्ती पर गाली दे बैठे|

इसी तरह इंग्लैंड और न्यूज़ीलैण्ड के बीच मैच में एक वक़्त इंग्लैंड बड़ी आसानी से 350 बनाती नज़र आ रही थी मगर 315 रन बनाये, उसके बाद जब न्यूज़ीलैण्ड के 69 पर चार विकेट गिर गए तब अचानक जो रुट गेंदबाज़ी के लिए आ गए| कप्तान मॉर्गेन के इस पहले पर सभी क्रिकेट पंडित अचंभित थे | हैरानी इस बात की थी कि इंग्लैंड के पास 6 रेगुलर गेंदबाज़ होने बावजूद जो रुट से गेंदबाज़ी क्यों ? क्या इसलिए कि न्यूज़ीलैण्ड पर से दबाव थोड़ा कम हो और उनका रन रेट ज़्यादा बिगड़ने से बच सके|

अब बात यह है यह सारी घटनाएं संयोग हैं या फिर कोई अंदरूनी कहानी है| संयोग है तो बड़ा दिलचस्प है और अगर कोई अंदरूनी कहानी है तो यह क्रिकेट के खेल के लिए एक बदनुमा दाग़ होगी|

दरअसल इन सारी आशंकाओं को बल इस बात से मिलता है कि जैसे जैसे विश्व कप आगे बढ़ा '92 विश्व कप के संयोग की बातों को हवा मिलने लगी और पाकिस्तान के 6 मैचों बाद तो ऐसा मानने वालों की संख्या काफी बढ़ने लगीं , ज़ाहिर है विश्व कप जीतने की दौड़ में लगीं टीमें भी इस ओर ज़रूर सोच रही होंगी और यह भी सही है कि यह टीमें बिलकुल नहीं चाहेंगी कि '92 के यह संयोग आगे के मैचों में हों इसलिए इस सिलसिले को यहीं ख़त्म करने के लिए इन टीमों में अगर कुछ अंडर स्टैंडिंग हुई हो तो किसी भी हालत में जीत हासिल करने के इस दौर में कुछ हैरानी की बात नहीं|