आदेश देने से पहले सोचें,  सरकार की SC से गुहार

आदेश देने से पहले सोचें, सरकार की SC से गुहार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उनका मकसद व्यवस्था में सुधार लाना है, न कि सरकार की आलोचना करना. दरअसल एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ में कहा कि अदालतें पर्यावरण, प्रदूषण और कूड़ा जैसे मुद्दों को लेकर दाखिल की जाने वाली पीआईएल पर आदेश जारी कर देती है, जबकि सरकार के पास संसाधन कम हैं और उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वेणुगोपाल ने कहा कि भारत की समस्याएं अनगिनत हैं.

इस पर जस्टिस लोकुर ने कहा कि कम से कम कोर्ट उनका समाधान खोजने की कोशिश तो कर रही है. उन्होंने कहा, 'हम सरकार की आलोचना नहीं कर रहे हैं. हम जानते हैं कि समस्याएं हैं. हम भी इसी देश के नागरिक हैं. ऐसा न जताइए कि हम सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उसे काम करने से रोक रहे हैं.'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण, पर्यावरण और कचरे की समस्या इतनी विकराल है कि इनको दरकिनार नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में गरीबी का आलम और सरकार के बजट खर्च करने की ये हालत है कि एक ओर तो लोगों के पास पहनने को कपड़ा और शिक्षा का बुनियादी इंतज़ाम तक नहीं है, लेकिन सरकार जनता को वाशिंग मशीन और लैपटॉप बांट रही है. क्या ये बजट का सही इस्तेमाल है?

कोर्ट ने ये टिप्पणी जेलों में बंद कैदियों की दुर्दशा के मामले में सुनवाई के दौरान की. इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिटायर्ड जज की अगुआई में कमेटी बनाई जाय जिसमे सरकार के दो अफसर भी हों. कमेटी जेलों में सुधार के लिए समय समय पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देगी.

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि भारत तरह तरह की समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसी हालत में न्यायपालिका को हर प्रकार की जनहित याचिका को समुचित तौर से सुनने की ज़रूरत है. इस पर जस्टिस लोकुर ने कहा कि हमने भी बहुत सी ऐसी चीज़ें देखी हैं जिससे देश में तमाम समस्याओं के समाधान के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल तक नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में कई संस्थान ऐसे हैं जिनकी देखरेख के लिए हमने कमेटी बनाकर काम तेजी से आगे बढ़ाने को कहा पर हुआ कुछ नहीं. कोर्ट ने कहा कि मनरेगा, विधवाओं का पुनर्वास और जेलों में बंद महिला कैदियों के बच्चों की दुर्दशा पर सरकार को पहले ही समय रहते काम करना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक के गरिमापूर्ण ढंग से जीने के अधिकार की रक्षा में जुटे हैं. हमने ऐसे कई मामलों में सरकार से अतिरिक्त धन आवंटन के आदेश भी दिए.

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