नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में वैशाली जिले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस चुनाव में वैशाली की दो सीटों पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद की राजनीतिक विरासत दांव पर है और इसका कारण यह है कि लालू प्रसाद के दो बेटे यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। महुआ सीट पर तेज प्रताप को एनडीए की तरफ से हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के उम्मीदवार रवींद्र राय की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि राघोपुर से तेजस्वी के सामने पिछले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पराजित करने वाले सतीश कुमार हैं।

लालू के लाल को परास्त करने के लिए एनडीए ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राघोपुर और महुआ से एनडीए ने यादव उम्मीदवार खड़े कर महागठबंधन के सामने एक मुश्किल चुनौती पेश कर दिया है। ऐेसे में यादव वोट में सेंधमारी तय माना जा रहा है। इन दोनों सीटों पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महादलितों की अच्छी खासी आबादी है। इसी कारण क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले कुशवाहा और महादलित वोटों पर भी दोनों पार्टियों की खास नजर है। वैशाली के राघोपुर और महुआ में सीटों पर 28 अक्टूबर को तीसरे चरण के दौरान मतदान होना है।

अगर राघोपुर सीट की बात करें तो राघोपुर सीट से लालू के छोटे बेटे 26 साल के नौंवी पास तेजस्वी इस चुनाव में अपना परचम लहराने के मिशन पर निकले हैं। जेडीयू-आरजेडी गठबंधन से बने ताजा राजनीतिक एवं जातीय समीकरण से तेजस्वी की राह में सतीश कुमार एक रोड़ा बन सकते हैं, जो बीजेपी के टिकट पर चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं। यही नहीं यादव बहुल इस क्षेत्र में पप्पू यादव भी यादव उम्मीदवार के जरिए लालू पुत्र को हराने का मन बना चुके हैं। यादव बाहुल्य इस सीट पर दोनो पार्टियों की निगाह यादव के साथ राजपूत मतदाताओं को साधने की है, जिसका ध्रुवीकरण उम्मीदवार का भविष्य तय कर सकता है।

यही कारण है कि तीसरे मोर्चे की तरफ से सपा ने बाहुबली नेता बृजनाथी सिंह को मैदान में उतार कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। यादव वोटर जहां तेजस्वी के पक्ष में दिख रहे हैं तो राजपूत बिरादरी का झुकाव एनडीए की तरफ है। तेजस्वी के लिए छपरा छोड़ कर तेजस्वी यहां आना भी मतदाताओं को रास नहीं आ रहा है।

हालांकि पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं तेजस्वी 15 साल तक पारिवारिक जीत का हवाला देते हुए इसे सुरक्षित सीट मान रहे हैँ, लेकिन यहां सुशील मोदी की रैली में जुटी भीड़ तेजस्वी के लिए चिंता का विषय जरूर है। मोदी ही नहीं राम विलास पासवान ने भी तेजस्वी की शैक्षणिक योग्यता से लेकर 17 लाख रुपए की बाइक की ठाठ-बाठ वाली जीवन शैली पर भी हमला बोला है।

जहां तक महुआ सीट की बात है तो यहां मामला काफी दिलचस्प है। महुआ में खुद राबड़ी ने चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। यहां आरजेडी उम्मीदवार तेज प्रताप का मुख्य मुकाबला तो एनडीए की ओर से हम के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक रवींद्र राय से है, लेकिन पप्पू यादव ने जोगेश्वर राय को मैदान में उतार कर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। जोगेश्वर राय पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार थे और तब जेडीयू की तरफ से रवींद्र राय ने उन्हें 21,925 वोटों से शिकस्त दी थी।

रवीन्द्र राय को महादलितों पर काफी भरोसा है। महुआ के मतदाता इस चुनाव में बदलाव देखना चाहते हैं। खासकर यहां के युवक विकास और बेरोजगारी के कारण हो रहे पलायन को लेकर चिंतित हैं। दो लाख से ज्यादा मतदाताओं वाले इस यादव बहुल क्षेत्र में न सिर्फ कोईरी और कुर्मी का बल्कि पिछड़ी और अगड़ी जाति के मतदाताओं का भी अच्छा खासा प्रभाव है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां तेज प्रताप की नहीं बल्कि आरजेडी के वजूद की लड़ाई है। जहां एक तरफ लोग तेजप्रताप में लालू जैसा तेज नहीं होने पर निराश है तो दूसरी तरफ क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले रविंद्र राय के टिकट काटने से नीतीश पर नाराज। इधर, एनडीए की तरफ से राय को नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मिलने का भरोसा है। तेजप्रताप भले ही नए हों लेकिन उनके पास राजनीतिक विरासत है। हालांकि राय को भी पिछड़े और अगड़ों का साथ मिलता दिख रहा है। ऐसे में मुकाबला दिलचस्प है।

लालू का जोर राघोपुर सीट पर है तो राबड़ी महुआ में डटी है। इन दोनो सीटों के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लालू के दोनों बेटों की जीत के लिए आस-पास की सीटें राजापाकर, पातेपुर और हाजीपुर का समीकरण अपने पक्ष में करते हुए तीनों सीट पर वैसे ही उम्मीदवार खड़े किये जा रहे हैं जो राघोपुर और महुआ में मददगार हों। इस चुनावी बिसात में वर्तमान विधायकों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जहां तेजस्वी के लिए राघोपुर से सतीश कुमार तो वहीं तेजप्रताप के लिए महुआ से आरजेडीके टिकट पर दूसरे नंबर पर रहे जागेश्वर राय का टिकट काट दिया गया। बिहार चुनाव के इस हॉट सीट्स पर किसकी कब्जा होता है, इसके लिए चुनाव परिणाम तक का इंतजार करना पड़ेगा।