वाराणसी
वित्तीय साक्षरता और उधारकर्ता सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), कानपुर ने उत्तर प्रदेश माइक्रोफाइनेंस एसोसिएशन (UPMA) के सहयोग से वाराणसी एवं आसपास के क्षेत्रों में कार्यरत माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) के उधारकर्ताओं हेतु एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ज़िम्मेदार सूक्ष्म वित्तीय ऋण, उधारकर्ता संरक्षण, निष्पक्ष व्यवहार तथा डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ वाराणसी के पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल एवं आरबीआई, कानपुर के क्षेत्रीय निदेशक श्री राजीव द्विवेदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के प्रतिनिधि तथा UPMA के सदस्य भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल ने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और धोखाधड़ी के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रतिभागियों को सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी , पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें तथा अपने बैंक खाते का दुरुपयोग ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में न होने दें। साथ ही उन्होंने केवल पंजीकृत एवं विश्वसनीय संस्थाओं से ही ऋण लेने की सलाह दी।

आरबीआई, कानपुर के क्षेत्रीय निदेशक श्री राजीव द्विवेदी ने उधारकर्ता सुरक्षा के प्रति केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए जिम्मेदार ऋण उपयोग और वित्तीय अनुशासन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अनियमित संस्थाओं एवं धोखाधड़ीपूर्ण निवेश योजनाओं से बचने के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने माइक्रोफाइनेंस के विभिन्न पहलुओं, ‘मुख्य तथ्य विवरण’ (Key Fact Statement) की समझ, उधारकर्ताओं के अधिकारों तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही प्रतिभागियों को डिजिटल लेन-देन के सुरक्षित उपयोग और साइबर सुरक्षा के उपायों के प्रति भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जहां ऋण लेने एवं उसके जिम्मेदार पुनर्भुगतान, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। यह कार्यशाला न केवल वित्तीय जागरूकता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि उधारकर्ताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई।