जनधन से बदली भारत की बैंकिंग तस्वीर: 57.78 करोड़ खाते, जमा ₹2.94 लाख करोड़
नई दिल्ली:
देश में वित्तीय समावेशन को लेकर सरकार की पहल लगातार व्यापक असर दिखा रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत 25 फरवरी 2026 तक देशभर में 57.78 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹2.94 लाख करोड़ से अधिक की जमा राशि है। इनमें से 55 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि लगभग 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं।
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में शुरू किया गया राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन अब बैंकिंग, बीमा, पेंशन और ऋण योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ रहा है।
सरकार की अन्य प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी व्यापक भागीदारी देखने को मिली है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत अब तक 26.88 करोड़ से अधिक नामांकन हुए हैं, जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 57.11 करोड़ लोगों को दुर्घटना बीमा कवर मिला है। इसके अलावा अटल पेंशन योजना में 8.84 करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है।
छोटे कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक 57.26 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹39.48 लाख करोड़ से अधिक है। वहीं स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला उद्यमियों को ₹62,790 करोड़ से अधिक के ऋण प्रदान किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ढांचा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली ने सरकारी योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।
उद्योग जगत का कहना है कि इन योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) नेटवर्क और असिस्टेड बैंकिंग मॉडल की भूमिका भी तेजी से बढ़ी है। देश के सबसे बड़े BC नेटवर्क में से एक BLS E-Services के जरिए ही अब तक 2 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹10,000 करोड़ से अधिक की जमा राशि जुटाई गई है। यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में निजी क्षेत्र की भागीदारी कितनी अहम होती जा रही है।
BLS E-Services के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) लोकनाथ पांडा ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
“जनधन खातों की संख्या और बीमा, पेंशन तथा ऋण योजनाओं में बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि देश के करोड़ों लोग अब औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि इस परिवर्तन की असली ताकत अंतिम छोर पर दिखती है, जहां बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क और असिस्टेड डिजिटल बैंकिंग मॉडल गांवों और छोटे कस्बों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों, फिनटेक कंपनियों और BC नेटवर्क के बीच सहयोग वित्तीय समावेशन को और मजबूत करेगा।
“तकनीक, आधार प्रमाणीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी इन योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत का वित्तीय समावेशन अभियान केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीमा सुरक्षा, पेंशन और ऋण तक वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।








