लखनऊ
‘अमन व इंसाफ़ तहरीक’ की ओर से आज उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ‘अमन व आस्था के समर्थन, अत्याचार व अन्याय के विरोध’ के विषय पर आयोजित की गई। इसमें मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नक़वी, तंज़ीमुल मकातिब के सचिव मौलाना सैय्यद सफी हैदर ज़ैदी और प्रसिद्ध आलिम मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी सहित कई धार्मिक रहनुमाओ ने भाग लिया और वैश्विक स्तर पर फैली अशांति और मानवअधिकरो के उलंघन पर चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से अमेरिकी वर्चस्ववाद और इज़राइली बर्बरता की निंदा की गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि दुनिया की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। वैश्विक शक्तियां दुनिया में अशांति और युद्ध को बढ़ावा देना चाहती हैं, जिसका हम विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ ताकतों ने दुनिया पर कब्ज़ा कर अपनी कॉलोनियां बना ली थीं। उन्होंने कमजोर देशों पर कब्ज़ा कर उनके प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा को अपने नियंत्रण में ले लिया था, और आज भी वही प्रयास हो रहा है। इन ताकतों ने अलग-अलग बहानों से अफगानिस्तान, इराक, सीरिया और लीबिया को तबाह कर दिया और अब उनकी नज़रे ईरान पर हैं। मौलाना ने कहा कि जिस तरह वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का अमेरिका द्वारा अपहरण किया गया, उसकी वैश्विक स्तर पर निंदा होनी चाहिए थी, लेकिन अफसोस कि दुनिया खामोश रही। वेनेज़ुएला पर कब्जे का असली उद्देश्य उसके तेल भंडार पर नियंत्रण था। इस समय दुनिया में तेल पर कब्जे की जंग चल रही है, जिसमें अमेरिका आगे है। मौलाना ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह एक संप्रभु और लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा हैं, उसकी निंदा होनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्लामी इंक़ेलाब के लीडर आयतुल्लाह खामेनई के अपहरण और हत्या की धमकी दी है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। मौलाना ने कहा कि हम हरगिज़ यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाया जाए या हमारे पवित्र धार्मिक स्थलों पर हमला किया जाए। यदि इराक या ईरान में हमारे धार्मिक नेतृत्व या पवित्र स्थलों पर हमला किया गया तो हम भारत में किसी भी पवित्र धार्मिक स्थल पर किसी अमेरिकी या इज़राइली को प्रवेश नहीं करने देंगे,यह बात हम अपनी सरकार से भी कहना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया के रवैये की भी आलोचना की और कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी सच्चाई का समर्थन करना है, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय अमेरिका और इज़राइल की नीतियों का समर्थन कर रहा है। अमेरिका और इज़राइल जिसे आतंकवादी कहते हैं, मीडिया भी उसे आतंकवादी कहने लगता है, यह मानसिक और वैचारिक गुलामी को दर्शाता है। मौलाना ने कहा कि जो देश पूरी दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, उनकी निंदा करने के बजाय मीडिया कभी आयतुल्लाह खामेनई का अपमान करता है, जो असहनीय है, और कभी सैय्यद हसन नसरुल्लाह और क़ासिम सुलेमानी को आतंकवादी कहता है। उन्होंने कहा कि गाज़ा में इज़राइल ने सैकड़ों पत्रकारों की हत्या कर दी, लेकिन मीडिया निंदा तक नहीं करता। इज़राइल फिलिस्तीनियों की जमीन पर कब्ज़ा किए हुए है और लगातार उनका नरसंहार कर रहा है, लेकिन फिलिस्तीनियों के हक़ की बात करने के बजाय इज़राइली मज़लूमियत का नौहा पढ़ा जा रहा है। यदि मीडिया ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे। मौलाना ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के पक्ष में वोट देने के लिए भारत सरकार का धन्यवाद भी किया और कहा कि भारत को फिलिस्तीन और ईरान के समर्थन में अपने पुराने रुख पर कायम रहना चाहिए, यही हमारी मांग है। उन्होंने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की जामा मस्जिद में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की और कहा कि पाकिस्तान में सरकार और सेना के संरक्षण में शियों का नरसंहार किया जा रहा है, लेकिन दुनिया खामोश है। विशेष रूप से हमारे देश के उलेमा और मुफ्ती शिया नरसंहार पर चुप हैं, जिससे आतंकवादियों का हौसला बढ़ता है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए मौलाना सफी हैदर ज़ैदी ने कहा कि हम आज इस उद्देश्य से एकत्र हुए हैं कि अमन व शांति का समर्थन करें और वैश्विक स्तर पर जारी अत्याचार व अन्याय का विरोध करें। उन्होंने कहा कि हमारा देश हिंदुस्तान हमेशा शांति का समर्थक और युद्ध का विरोधी रहा है, इसलिए हम यहां एकत्र हुए हैं ताकि देशवासियों के साथ मिलकर शांति और एकता का संदेश फैलाया जा सके। हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि सभी धर्मों के मानने वाले एक मंच पर एकत्र होकर दुनिया में फैली अशांति और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करें। उन्होंने कहा कि हमारे देश में न्याय और शांति के लिए आवाज़ उठाने वालों की कमी नहीं है, इसलिए हम सबको साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्याय और शांति कभी आक्रामकता से स्थापित नहीं हो सकते। आज साम्राज्यवादी ताकतें ताक़त के नशे में दुनिया की शांति को नष्ट करने पर तुली हैं। विशेष रूप से जिस तरह ईरान को धमकियां दी जा रही हैं, वह तानाशाही का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने इस अवसर पर ‘राष्ट्रीय शांति अभियान’ की घोषणा की, जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर हस्ताक्षर अभियान, प्रदर्शन, सम्मेलन और सोशल मीडिया के माध्यम से इस आक्रामक रवैये के खिलाफ संगठित और लगातार आवाज उठाई जाएगी। यह किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी मानवता का प्रश्न है। यदि आज किसी एक देश के नेतृत्व को निशाना बनाया गया तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। हम ईरान की जनता और उसके नेतृत्व के साथ एकजुटता से खड़े हैं और हर प्रकार की धमकीपूर्ण राजनीति को अस्वीकार करते हैं।

मौलाना जहांगीर आलम कासमी ने कहा कि अत्याचार कहीं भी हो और किसी पर भी हो, उसकी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया नरसंहार निंदनीय है, जिस पर दुनिया को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा अमेरिका और इज़राइल द्वारा दिया जा रहा है। गाज़ा में मासूम बच्चों और निर्दोषों की हत्या की गई, नेतन्याहू और ट्रंप मानवता के अपराधी हैं, जिन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता। जब तक अमेरिका और इज़राइल जैसी ताकतें सक्रिय हैं, शांति स्थापित नहीं हो सकती। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के नेतृत्व को दी जा रही हत्या और अपहरण की धमकियों को असहनीय बताया और इस्लामी जगत तथा दुनिया के सभी शांति-प्रेमी लोगों से साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।