क़ुम में ग्लोबल एक्सप्रेस के फाउंडर नुसरत अली सम्मानित
क़ुम (ईरान)
ग्लोबल एक्सप्रेस मीडिया ग्रुप के संस्थापक एवं संपादक, साथ ही समाजसेवी नुसरत अली को ईरान के पवित्र शहर क़ुम में हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.अ.) के रौज़े पर उनकी सामाजिक, शैक्षणिक और मीडिया सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान मासूमा-ए-क़ुम (स.अ.) के हरम में आयोजित एक गरिमामय समारोह में अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रभारी आगा हसन जहांगीरी साहब द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ज़ायरीन और करवान-ए-नूर के सदस्य उपस्थित रहे।
सम्मान प्रदान करते हुए आगा हसन जहांगीरी साहब ने कहा कि “कम उम्र में जिस तरह नुसरत अली ने समाज, मीडिया और मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है, उसे देखते हुए यह सम्मान अपने प्रकार का पहला सम्मान है, जो इस तरह किसी को दिया जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि भारत यात्रा के दौरान उनका भारत से विशेष लगाव हुआ और वहीं उन्होंने नुसरत अली के कार्यों को क़रीब से जाना। ग्लोबल एक्सप्रेस मीडिया ग्रुप के संस्थापक होने के साथ-साथ नुसरत ट्रस्ट के ज़रिए कोविड काल से लेकर सामाजिक दीवार-ए-करुणा जैसी मुहिमों और कई भाषाओं में अपनी क़लम से रौशनी फैलाने वाले कार्यों को देखकर यह सम्मान उन्हें समर्पित किया गया।
आगा जहांगीरी ने यह भी कहा कि उन्हें दो बार नुसरत अली के साथ ज़ियारत का अवसर मिला और उनका 27वाँ सफल ज़ियारत सफ़र उनकी शख़्सियत में और निखार लाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नुसरत अली को एक रोल मॉडल के रूप में देखें।
इस मौके पर करवान-ए-नूर से नुसरत अली की सक्रिय संबद्धता और उसके आयोजक सैयद निहाल हैदर रिज़वी की सेवाओं की भी सराहना की गई। ज़ायरीनों से मिले सकारात्मक फीडबैक के आधार पर निहाल रिज़वी साहब को भी सम्मान प्रदान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि करवान-ए-नूर केवल एक ज़ियारत टूर नहीं, बल्कि एक मिशन की तरह कार्य कर रहा है।
समारोह में अंजुमन-ए-नासिरुल अज़ा की ऐतिहासिक सेवाओं के लिए रफ़ीक़ुल हसन साहब को परचम (ध्वज) भेंट किया गया। वहीं क़ौमी ख़िदमत के क्षेत्र में निरंतर योगदान के लिए संबंधित गणमान्य व्यक्तियों को भी परचम से नवाज़ा गया।
इसके अलावा शूरा-ए-किराम, विशेष रूप से छोटी बच्ची फ़ातिमा और अलमदार-ए-करवान-ए-नूर को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में जनाब शफ़ी हसन रिज़वी साहब ने दुआएं पढ़ीं। इसके पश्चात आगा हसन जहांगीरी साहब ने हज़रत मासूमा (स.अ.) का परचम सभी को ज़ियारत कराया और हरम की ओर से ज़ायरीनों को तबर्रुकात में नमक व रौज़े का तोहफ़ा बरकत के रूप में प्रदान किया गया।
इस अवसर पर नुसरत अली ने आगा हसन जहांगीरी साहब से अपने पुराने रिश्तों का ज़िक्र करते हुए बताया कि सबसे पहले वे उनके भाई नवाज़ के निकाह के सिलसिले में भारत आए थे, फिर पिछले वर्ष नोगांवा में आयोजित महफ़िल-ए-नूर में शिरकत के लिए भारत पहुँचे और लखनऊ में मेज़बानी का अवसर भी मिला।
अंत में करवान-ए-नूर की ओर से मासूमा-ए-क़ुम (स.अ.) के हरम, विशेष रूप से आगा हसन जहांगीरी साहब और उनके सहयोगी शफ़ी रिज़वी साहब का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही भारत और ईरान की सलामती और तरक़्क़ी के लिए ज़ायरीनों ने विशेष दुआ की।










