“भारत का क्रेडिट परिदृश्य तेजी से परिपक्व हो रहा है, जहां पर्सनल लोन, ईएमआई आधारित उत्पाद, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी और टू-व्हीलर लोन जैसे विकल्प लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों के साथ-साथ उनकी आकांक्षाओं को भी पूरा कर रहे हैं। ‘हाउ इंडिया बॉरोज़ 7.0’ अध्ययन के अनुसार, आज उधार लेने के फैसलों में वहनयोग्यता और लचीलापन सबसे अहम हैं—46% उपभोक्ता आसान ईएमआई को प्राथमिकता देते हैं, 38% तेज़ डिस्बर्सल को महत्व देते हैं और 37% ग्राहक समय से पहले लोन बंद करने जैसी सुविधाएं चाहते हैं। यह रुझान पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित क्रेडिट समाधानों की बढ़ती मांग को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।साथ ही, उपभोक्ता अब कर्ज़ लेने को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं, जिससे वित्तीय साक्षरता और जिम्मेदार उधार प्रथाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने आती है, विशेषकर अनसिक्योर्ड लेंडिंग के विस्तार के साथ।

2026 के केंद्रीय बजट से हमारी अपेक्षा है कि वह जिम्मेदार लेंडिंग को बढ़ावा देने पर निरंतर ध्यान दे—जिसमें वित्तीय जागरूकता, पारदर्शिता के मजबूत ढांचे और उन्नत क्रेडिट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश शामिल हो। ऐसे कदम उपभोक्ताओं को भरोसे और स्पष्टता के साथ क्रेडिट अपनाने में सक्षम बनाएंगे।

2025 के बजट में उपभोग को प्रोत्साहन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती और वित्तीय समावेशन पर दिया गया जोर एक मजबूत आधार तैयार कर चुका है। इसी गति को आगे बढ़ाते हुए, आगामी बजट क्रेडिट को भारतीय परिवारों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता और रोज़मर्रा की स्थिरता का सशक्त माध्यम बना सकता है।”