प्रियंका गांधी की सक्रियता से हिलने लगी सपा-बसपा की सियासी ज़मीन?

प्रियंका गांधी की सक्रियता से हिलने लगी सपा-बसपा की सियासी ज़मीन?

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।सियासी खेल भी अजीबोग़रीब होता है सालों की मेहनत पल भर में ख़त्म हो जाती हैं वैसे तो हर खेल में यही होता है एक दाँव ग़लत पड़ जाने पर सब कुछ उलटफेर कर देता है लेकिन सियासत में हुआ उलटफेर दोबारा मौक़ा नहीं देता उसको सही करने का उदाहरण के तौर पर कांग्रेस अपनी ग़लतियों की वजह से उत्तर प्रदेश की सियासत से पिछले तीस सालों से बाहर चल रही है अगर कांग्रेस सियासी ग़लतियाँ न करती तो शायद सपा कंपनी का उदय न होता।कांग्रेस अपनी ग़लतियों से सबक़ लेते हुए अपनी खोयी हुई सियासी ज़मीन पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है लेकिन इस बार कांग्रेस को यूपी में मज़बूत करने की ज़िम्मेदारी गांधी ख़ानदान की बेटी पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी प्रभारी उप्र ने खुद संभाल रखी है उसका असर दिखने भी लगा है जिस तरीक़े से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी यूपी की सियासत में सक्रिय होकर सरकार सहित विपक्ष को भी मजबूर कर रही है प्रियंका गांधी कोई मौक़ा नहीं छोड़ रही हैं सरकार को घेरने का जबकि कांग्रेस यूपी में विपक्ष की भूमिका में नहीं उसके बाद भी वह विपक्ष की भूमिका निभा रही हैं और विपक्ष खामोशी की चादर ओढ़े आराम की नींद सो रहा है उसी की नींद का फ़ायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है।CAA , NRC , व NPR को लेकर देशभर में चल रहे आंदोलन में सबसे ज़्यादा नुक़सान यूपी में हुआ क्योंकि यूपी की योगी सरकार आंदोलन को कुचलना चाहती थी और उसने पुलिस को ढाल बनाकर आंदोलन को कुचला भी जिसमें सरकार के मुताबिक़ 19 लोगों के मारे जाने की पुष्टी होती हैं जबकि ये आँकड़ा ज़्यादा भी हो सकता है पुलिस ने जिस तरीक़े से आंदोलनकारियों पर अत्याचार किए उसे सुन रोंगटे खड़े हो जाते हैं लोगों के मुताबिक़ पुलिस शांतिपूर्ण तरीक़े से चल रहे आंदोलन को हिंसात्मक रूप देने पर तुली हुई थी और जब उसका मक़सद पूरा हो गया तब उसने घरों में घुसकर तोड़फोड़ लूटपाट भी की ऐसे-ऐसे भी वीडियो आए जिसमें पुलिस के आलाधिकारी मौक़े पर ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जिसकी इजाज़त उन्हें नहीं है लेकिन जब इंसाफ़ करने वाला पार्टी बन जाए तो वह इंसाफ़ नहीं जुर्म पर उतर आता है वही हुआ सरे आम लोगों पर यह जुर्म होता रहा और सियासी दुकानें चलाने वाले खामोशी की चादर ओढ़े सोए हुए थे सिर्फ़ कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी को छोड़कर अब जब लगने लगा कि कांग्रेस यूपी में लोगों की चौपालों पर चर्चा का केन्द्र बन रही है तब जाकर सपा कंपनी और बसपा कंपनी की निद्रा टूटी है अब सपा के सीईओ अखिलेश यादव भी सीएए के विरोध में मरने वालों को पाँच लाख रूपये देने की घोषणा कर रहे हैं और बसपा कंपनी भी आई मैदान में CAA के विरोध के चलते मारे गए लोगों को मुआवज़ा दे सरकार, न्यायिक जाँच की भी माँग की है प्रियंका गांधी ने सभी प्राइवेट कंपनियों की नींद हराम कर दी है ऐसा प्रतीत हो रहा है जो दल सीएए को लेकर खामोशी अख़्तियार किए हुए थे अब वह भी बोलने को मजबूर हो गए हैं सपा कंपनी के बाद बसपा कंपनी ने भी अपनी रफ़्तार को तेज़ी देते हुए सतीश मिश्रा के नेतृत्व में बीएसपी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल से मिलने को भेजा साथ में मुनकाद अली भी थे।बीएसपी महासचिव सतीश मिश्रा का बयान।नागरिकता कानून के विरोध में हुए दंगों में जनहानि को लेकर सौंपा ज्ञापन।प्रदेश में हुए दंगे की न्यायिक जांच की मांग की।दंगे में जिन परिवारों के लोगों की मौत हुई है उनको सरकार मुआवजा दे।सरकार द्वारा सुनोयोजित दंगे के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजे गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।CAA कानून विरोध प्रदर्शन में लिखे गए मुकदमे तत्काल प्रभाव में वापस लिए जाएं।सीएए के विरोध में खड़े लोगों की आवाज़ों को दबाया जा रहा है।यह कहाँ हैं बसपा ने राज्यपाल से। बसपा व सपा कंपनी की खामोशी की चादर से लोगों में उनके प्रति अलग ही छवि बन रही थी कांग्रेस के प्रति प्यार उमड़ रहा है इसकी वजह कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी की सक्रियता को माना जा रहा है रही बात बसपा कंपनी की उसको लेकर कोई ज़्यादा अफ़सोस नहीं है क्योंकि सपा कंपनी को जिस तरीक़े से पाला पोसा है उस तरह वह इस आन्दोलन में सहयोग नहीं कर पाई है जिसका ख़ामियाज़ा उसको भुगतना पड़ सकता है उसी को भाँपते हुए सपा कंपनी के सीईओ अखिलेश यादव ने हर रोज़ कुछ न कुछ बयानबाज़ी कर मामले में अपने आपको CAA के फ़ोकस में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। सियासी ज़मीन खिसकती देख दोनों सियासी कंपनियाँ लगी गुणाभाग करने में क्या जनता इनको मांफ कर फिर से अपना विश्वास जताएगी यह सवाल बना रहेगा।