बीजेपी की आदित्यनाथ सरकार में महिला संरक्षण गृह बने नरक गृह: कांग्रेस

बीजेपी की आदित्यनाथ सरकार में महिला संरक्षण गृह बने नरक गृह: कांग्रेस

लखनऊ: देवरिया में जिस तरीके से बालिका संरक्षण गृह में देह व्यापार चल रहा था और उसके बाद हरदोई के बेनीगंज में रह रहीं महिलाएं गायब हैं इसी तरीके से अन्य जनपदों में संरक्षण गृह के नाम पर अवैध कार्य हो रहे हैं उससे स्पष्ट होता है कि बीजेपी सरकार में महिला संरक्षण गृह महिलाओं, किशोरियों एवं नाबालिग बच्चियों के लिए नरक गृह बन गये हैं। वर्ष 2017 में चुनाव के समय बीजेपी ने नारा दिया था महिलाओं के सम्मान में-भाजपा मैदान में, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, बहुत हुआ महिलाओं पर अत्याचार-अबकी बार भाजपा सरकार। इन नारों के उलट बहनों, बेटियों के साथ बराबर दुराचार, बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं और सबसे शर्मनाक यह है कि उसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता, विधायक संलिप्त पाये जा रहे हैं।

देवरिया मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर से सटा हुआ है। वहां पर इतनी बड़ी घिनौना कृत्य हो रहा था और शासन-प्रशासन पूरी तरह आंख मूंदे बैठा रहा। मुख्यमंत्री जी बार-बार महिला सुरक्षा के खोखले दावे करते रहते हैं किन्तु प्रदेश में इस तरह के कृत्य बराबर घटित हो रहे हैं।

देवरिया के प्रकरण में विभागीय मंत्री डॉ0 रीता बहुगुणा जोशी जो स्वयं महिला हैं उनके द्वारा दिया गया बयान बहुत ही शर्मनाक एवं गैरजिम्मेदाराना है। उनके विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जिलाधिकारी को बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद संरक्षण गृह का अवैध संचालन आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था और जांच करने की जिम्मेदारी जिस तरीके से विभागीय प्रमुख सचिव को ही दी गयी है इसी से सरकार का चरित्र पता चलता है की मामले को रफा-दफा करने की पूरी तैयारी की जा रही है।

कांग्रेस पार्टी सवाल करती है कि विभागीय प्रमुख सचिव एक ही विभाग में पिछले पांच साल से जमी हुई हैं आखिर जांच कमेटी में गृह सचिव को क्यों नहीं भेजा गया? जिलाधिकारी को हटाने को कार्यवाही बताने वाली यह सरकार निलम्बित करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पायी? निश्चित रूप से सत्ता का संरक्षण इस घटना में परिलक्षित होता है।

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि जिस तरीके से बराबर महिला संरक्षण गृह में महिलाओं, बालिकाओं के साथ बलात्कार, अत्याचार हो रहा है और विभागीय मंत्री अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए पिछली सरकारांे को दोष दे रही हैं वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और मुख्यमंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए।

Lucknow, Uttar Pradesh, India