बाबरी मस्जिद मामला: सुब्रमनियम स्वामी की याचिका पर फैसला टला

बाबरी मस्जिद मामला: सुब्रमनियम स्वामी की याचिका पर फैसला टला

निचली अदालत के डिजिटल रिकॉर्ड के बारे में रजिस्ट्रार को नोटिस जारी

मुंबई: बाबरी मस्जिद के स्वामित्व के विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जमीअत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी के निर्देश पर दाखिल की गई याचिका पर आज सुनवाई हुई जिसमें जजों ने निचली अदालत की कार्यवाही डिजिटल फार्म में तैयार किए जाने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है और इस महीने की 23 तारीख को अपना जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। राम मंदिर निर्माण के समर्थन में सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से बतौर हस्तक्षेप कार अनुरोध पर जमीअत वकीलों तीव्र विरोध के बाद आज भी कोई फैसला नहीं हो सका। यह जानकारी आज यहां मुंबई में जमीअत उलेमा कानूनी सहायता समिति के प्रमुख गुलजार आजमी ने पत्रकारों को दी।

गुलजार आजमी के अनुसार जमीअत उलेमा की ओर से आज वरिष्ठ वकील नित्यराम कृष्णन और एडवोकेट अर्शा हनीफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका पर चर्चा करने के लिए मौजूद थे, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड अब तक तैयार नहीं हो सके हैं इसलिए आज इस मामले में चर्चा नहीं हो सकी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया और डिजिटल रिकॉर्ड के बारे में क्या पहल हुई है अब तक इस जानकारी मांगी है।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर 1949 की रात में बाबरी मस्जिद में कथित तौर पर रामलला की उपस्थिति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बाबरी मस्जिद को धारा 145 के तहत अपने अधिकार में कर लिया था जिसके खिलाफ इस समय जमीअत उलेमा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष मौलाना सैयद नसीरुद्दीन फैजाबाद और महासचिव मौलाना मुहम्मद कासिम शाहजाँ पुरी ने फैजाबाद की अदालत से संपर्क किया था जिसका निपटान पिछले वर्षों इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा स्वामित्व को तीन भागों में विभाजित करके किया गया था .उक्त फैसले के खिलाफ जमीअत उलेमा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर आज सुनवाई प्रक्रिया आई।

याद रहे कि जमीअतुल उलमा बतौर अर्ज़ गुजार सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लंबित याचिका में शामिल है। गौरतलब है कि मामले की पिछली सुनवाई (16 /अक्टूबर 2016) के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और जस्टिस वी गोपाल गोड्डा ने प्रेक्षक की अवधि का विस्तार करते हुए निचली अदालत के डिजिटल रिकॉर्ड तलब किए थे लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड अनुपलब्धता के बाद आज अदालत ने रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया।

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